Frequently Asked Questions (FAQs)

राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग:
     •   राजस्थान में मानव अधिकारों के प्रभावी संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों का बोध राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग के क्रिया-कलापों से होता है। इसका गठन मार्च 1999 में हुआ था मार्च 2000 में आयोग क्रियाशील हुआ।
मानव अधिकार क्या हैं:? 
     •   मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 2(घ) के अनुसार ‘‘मानवअधिकारों’’ से तात्पर्य संविधान द्वारा प्रत्याभूत अथवा अन्तर्राष्ट्रीय प्रसंविदाओं में अन्‍तर्निहित उन अधिकारों से है जो जीवन, स्वतंत्रता, समानता एवं प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा से आशय संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 16 दिसम्बर,1966 को अभिस्वीकृत, अंतर्राष्ट्रीय नागरिक एवं राजनीतिक अधिकार प्रसंविदा से है।
राज्य आयोग के कार्य एवं उसमें निहित शक्तियां :
     •   आयोग निम्नलिखित सभी या किन्हीं कृत्यों का निष्पादन करेगा, अर्थात्- 
     •   (क)स्वप्रेरणा से या किसी पीड़ित या उसकी ओर से किसी व्यक्ति द्वारा उसे प्रस्तुत याचिका पर 
     •   (1)मानव अधिकारों के उल्लंघन या उसके अपशमन की, या
     •   (2)किसी लोक सेवक द्वारा उस उल्लंघन को रोकने में उपेक्षा की शिकायत की जांच करेगा,
     •   (ख)किसी न्यायालय के समक्ष लम्बित मानव अधिकारों के उल्लंघन के किसी अभिकथन वाली किसी कार्यवाही में उस न्यायालय की अनुमति से हस्तक्षेप करेगा,
     •   (ग)राज्य सरकार को सूचना देने के अध्यधीन, राज्य सरकार के नियन्त्रणाधीन किसी जेल या किसी अन्य संस्था का, जहॉं पर उपचार, सुधार या संरक्षण के प्रयोजनार्थ व्यक्तियों को निरूद्ध किया जाता है या रखा जाता है निवास करने वालों की जीवन दशाओं का अध्ययन करने एवं उस पर सिफारिशें करने के लिए निरीक्षण करेगा,
     •   (घ)मानव अधिकारों के संरक्षण के लिए संविधान या तत्समय प्रवृत्त किसी कानून द्वारा या उसके अधीन प्रावहित सुरक्षाओं का पुनर्वालोकन करेगा तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सिफारिशें करेगा, 
     •   (ड) उन कारकों का, जिसमें उग्रवाद के कृत्य भी हैं, मानव अधिकारों के उपयोग में बाधा डालते हैं, पुनरावलोकन करेगा एवं उपयुक्त उपचारात्मक उपायों की सिफारिश करेगा, 
     •   (च)मानव अधिकारों ने क्षेत्र में अनुसंधान एवं उसे प्रोन्नत करेगा, 
     •   (छ)समाज के विभिन्न खण्डों में मानव अधिकार साक्षरता का प्रसार करेगा तथा प्रकाशकों, साधनों (मीडिया) सेमीनारों एवं अन्य उपलब्ध साधनों के माध्यम से इन अधिकारों के संरक्षण के लिए उपलब्ध सुरक्षाओं के प्रति जागरूकता को विकसित करेगा, 
     •   (ज) मानव अधिकारों के क्षेत्र में कार्य करने वाले गैर सरकारी संगठनों एव संस्थाओं के प्रयत्नों को प्रोत्साहन देगा, 
     •   (झ)ऐसे अन्य कृत्य करेगा जिन्हें वह मानव अधिकारों के संवर्धन के लिए आवश्यक समझेगा।
आयोग में निहित जांच से संबंधित शक्तियां :
अधिनियम के अंतर्गत किसी शिकायत की जांच करते समय आयोग को सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत निम्नलिखित मामलों में, सिविल न्यायालय की सभी शक्तियां प्राप्त होंगी:- 
     •   (क)गवाहों को सम्मन जारी करके बुलाने तथा उन्हें हाजिरी हेतु बाध्य करने एवं उन्हें शपथ दिलाकर परखने के लिए, 
     •   (ख) किसी दस्तावेज का पता लगाने और उसको प्रस्तुत करने के लिए,
     •   (ग) शपथ पत्र पर गवाही देने के लिए, 
     •   (घ)किसी न्यायालय अथवा कार्यालय से किसी सरकारी अभिलेख अथवा उसकी प्रतिलिपि की मांग करने के लिए, 
     •   (ड) गवाहियों तथा दस्तावेजों की जॉंच हेतु कमीशन जारी करने के लिए, 
     •   (च) निर्धारित किए गए किसी अन्य मामले के लिए। 
क्या आयोग के पास अपना अन्वेषण दल है?
     •   जी हॉं। मानव अधिकारों के हनन से संबंधित शिकायतों की जांच करने के लिए आयोग के पास अपना अन्वेषण दल है। अधिनियम के अंतर्गत आयोग को इस बात की भी छूट प्राप्त है कि वह राज्य सरकार के किसी अधिकारी अथवा अभिकरण की सेवाओं का उपयोग कर सके।
क्या आयोग स्वायत्तशासी निकाय है:? 
     •   जी हॉं। आयोग की स्वायतत्ता इसके सदस्यों की नियुक्त के ढंग, उनके कार्यकाल की स्थिरता और सवैधानिक गारंटी, उनको दी गर्इ पदवी और आयोग के लिए, जिसमें अन्वेषण अभिकरण भी शामिल है, स्टाफ की नियुक्ति का तरीका, कर्मचारियों का दायित्व और उनके कार्य-निष्पादन से स्वयं स्पष्‍ट होता हो जाती है। आयोग की वित्तीय स्‍वायत्तता का वर्णन अधिनियम की धारा 33 में किया गया है।
     •   आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्यों की नियुक्ति मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित एक समिति जिसमें विधान सभा के अध्यक्ष, गृहमंत्री एवं विधान सभा के विपक्ष के नेता है सदस्य हैं कि अनुशंसा पर राज्यपाल द्वारा की जाती है।
आयोग द्वारा शिकायतों की जॉंच किस प्रकार से की जाती है:? 
     •   मानव अधिकारों के हनन से संबंधित शिकायतों की जांच करते समय आयोग राज्य सरकार अथवा उनके अधीन किसी अन्य प्राधिकरण अथवा संगठन से निर्दिष्टतारीख तक आयोग को सूचना या रिपोर्ट प्राप्त नहीं होती तो वह अपनी ओर से स्वयं शिकायत की जांच कर सकता है। दूसरी और ऐसी सूचना या रिपोर्ट प्राप्त होने पर आयोग यदि संतुष्ट हो जाता है कि अब आगे कोर्इ जॉंच करने की जरूरत नहीं है अथवा संबंधित राज्य सरकार या प्राधिकारी द्वारा अपेक्षित जॉंच शुरू कर दी गर्इ है तो वह, आम तौर से, ऐसी शिकायत पर आगे जॉंच नहीं करेगा तथा तदनुसार शिकायतकर्ता को तत्संबंधी कार्रवार्इ की सूचना दे देगा।
जॉंच के बाद आयोग क्या कार्रवार्इ कर सकता है?
जॉंच पूरी होने के पश्चात् आयोग निम्नलिखित में से कोर्इ भी कार्रवार्इ कर सकता है: 
     •   (1) जॉंच से आयोग को जहॉं यह पता चलता है कि लोक सेवक द्वारा मानव अधिकारों का हनन किया गया है अथवा उसने ऐसे हनन को रोकने की उपेक्षा की है तो ऐसी स्थिति मे आयोग राज्य अथवा प्राधिकारी को संबंधित व्यक्ति अथवा व्यक्तियों के खिलाफ अभियोजन अथवा ऐसी अन्य कार्रवार्इ शुरू करने की, जो उचित हो, अनुशंसा कर सकता है, 
     •   (2) आयोग उच्चतम न्यायालय या संबंधित उच्च न्यायालय से ऐसे निर्देशों, आदेशों अथवा रिपोर्टों के लिए, जो भी वह न्यायालय आवश्यक समझें, अनुरोध कर सकता है, 
     •   (3)आयोग पीड़ित व्यक्ति अथवा उसके परिवार के सदस्यों को, जिसे भी आयोग आवश्यक समझे, राज्य सरकार अथवा प्राधिकारी से अंतरिम सहायता तत्काल देने की अनुशंसा कर सकता है।
शिकायत किस भाषा में की जा सकती है?
     •   शिकायतें हिन्दी, अंग्रेजी अथवा संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किसी भाषा में भेजी जा सकती है। शिकायतें अपने आप में पूर्ण होनी चाहिए। शिकायतों के लिए कोर्इ फीस नहीं ली जाती। आयोग जब भी आवश्यक समझे आरोपों के समर्थन में और अधिक सूचना भेजने तथा शपथ-पत्र दाखिल करने की मांग कर सकता है। आयोग स्वविवेक से तार तथा फैक्स द्वारा भेजी गर्इ शिकायतें भी स्वीकार कर सकता है।
आयोग द्वारा किसी प्रकार की शिकायतों पर कार्रवार्इ नहीं की जाती?
आमतौर से निम्नलिखित प्रकार की शिकायतों पर आयोग द्वारा कार्रवार्इ नहीं की जाती: 
     •   क)ऐसी घटनाएं जिनकी शिकायतें उनके घटित होने के एक साल बाद की गर्इ हों, 
     •   ख ऐसे मामले जो न्यायालय में विचाराधीन हों, 
     •   ग) ऐसी शिकायतें भी, जो अस्पष्ट, बिना नाम अथवा छद्म नाम से की गर्इ हों, 
     •   घ)ऐसी शिकायतें जो ओछेपन की परिचाय कहों, 
     •   ड) ऐसी शिकायतें जो सेना से सम्बन्धित मामलों के बारे में हो। 
     •   च) यदि किसी शिकायत पर अन्य सक्षम आयोग द्वारा पूर्व में ही कार्यवाही आरम्भ की जा चुकी हो। 
     •   छ) ऐसी शिकायत जो मूलरूप से किसी अन्य आयोग/अधिकारी/प्राधिकारी को संबोधित की गर्इ हो 
आयोग द्वारा प्राधिकारी/राज्य सरकार को भेजी गर्इ रिपोर्ट/अनुशंसाओं के बारे में उनका क्या दायित्व है?
     •   आयोग द्वारा प्राधिकारी/राज्य सरकार को भेजी गर्इ सामान्य प्रकार की शिकायतों पर अपनी टिप्पणी की गर्इ कार्रवार्इ की सूचना आयोग का एक महीने के भीतर भेजनी होती है
आयोग के अब तक कार्यों का केन्द्र बिन्दु (फोकस) क्या है?
     •   आयोग के कार्य क्षेत्र में सभी प्रकार के वे मानव अधिकार आते हैं जिनमें नागरिक, राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकार शामिल हैं। आयोग हिरासत में हुर्इ मौतों, बलात्कार, उत्पीड़न, पुलिस और जेलों में ढांचागत सुधार, सुधार गृहों, मानसिक अस्पतालों की हालत सुधारने के मामलों पर विशेष ध्यान दे रहा है। समाज के सबसे अधिक कमजोर वर्ग के लोगों के अधिकारों का संरक्षण करने की दृष्टि से, 14 वर्ष की आयु तक के बच्चों को आवश्यक तथा निशुल्क शिक्षा प्रदान करने, गरिमा के साथ जीवन व्यतीत करने, माताओं और बच्चों के कल्याण हेतु प्राथमिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की, आयोग ने सिफारिशें की हैं। समानता और न्याय का हनन कर, नागरिकों के खिलाफ किए जा रहे अत्याचारों, विस्थापित हुए लोगों की समस्याएं और भूख के कारण लोगों की मौंतें, बाल श्रमिकों का शोषण, बाल वेश्यावृत्ति, महिलाओं के अधिकारों आदि पर आयोग ने अपना ध्यान केन्द्रित किया है। 
आयोग द्वारा शुरू किए गए अन्य प्रमुख कार्य:
     •   अपनी व्यापक रूप से बढ़ती हुर्इ जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए आयोग ने शिकायतों की जॉंच के अलावा निम्नलिखित कार्यों को भी अपने हाथ में लिया है 
नागरिक स्वतंत्रताएं:
     •   (1)पुलिस द्वारा गिरफ्तार करने के अधिकार के दुरूपयोग को रोकने के लिए दिशा-निर्देश। 
     •   (2) जिला मुख्यालय में ‘‘मानव अधिकार प्रकोष्‍ठ’’ की स्थापना। 
     •   (3)हिरासत में हुर्इ मौतों, बलात्कार और मानवीय उत्पीड़न को रोकने के उपाय। 
     •   (4)व्यवस्थागत सुधार 1) पुलिस, 2) जेल, 3) नजर बन्दी केन्द्र। 
     •   (5) माताओं में अल्परक्तता और बच्चों में जन्मजात मानसिक अपंगता की रोकथाम। 
     •   (6)एचआर्इवी/एड्स से पीड़ित लोगों के मानव अधिकार। 
     •   (7)मानसिक अस्पतालों की गुणवत्ता में सुधार
     •   (8) हाथ से मैला ढोने की प्रथा समाप्त करने के लिए प्रयास। 
     •   (9) गैर-अधिसूचत और खानाबदोश जनजातियों के अधिकारों का संरक्षण करने के लिए सिफारिशें करना।
     •   (10)जनस्वास्थ्य प्रदूषण नियंत्रण, खाद्य पदार्थो में मिलावट की रोकथाम, औषधियों में मिलावट व अवधिपार औषधियों पर रोक।
     •   (11) धर्म, जाति, उपजाति आदि के बहिष्कार के मामलात 
     •   (12) मानव अधिकारों की शिक्षा का प्रसार और अधिकारों के प्रति जागरूकता में वृद्धि।
क्या आप चाहतें हैं कि आपके परिवाद/शिकायत पर आयोग द्वारा शीघ्र प्रभावी कार्यवाही हो? 
यदि हां तो कृपया अपने परिवाद/शिकायत में यथा सम्भव निम्न सूचना अवश्य अंकित करें:-
     •   (क) पीडित व्यक्ति का नाम, पिता/पति का नाम, जाति, निवास का पता-गांव/शहर, डाकघर, पुलिस थाना जिले सहित। 
     •   (ख) जिस व्यक्ति/अधिकारी/कार्यालय के विरूद्व शिकायत, उसका पूरा विवरण। 
     •   (ग) शिकायत/घटना/उत्पीड़न का पूरा विवरण (घटना, स्थान, तारीख, महीना वर्ष सहित) 
     •   (घ) घटना की पुष्टि करने वाले साक्षियों के नाम-पता, यदि ज्ञात हो तो 
     •   (ड) घटना की पुष्टि में दस्तावेजी सबूत, यदि कोर्इ हो तो, 
     •   (च) यदि किसी अन्य अधिकारी/कार्यालय/मंत्रालय को शिकायत भेजी हो तो उसका नाम एवं उस पर यदि कोर्इ कार्यवाही हुर्इ हो तो उसका विवरण। 
     •   (छ)क्या आपने पूर्व में इस आयोग या राष्ट्रीय आयोग में इस विषय में शिकायत की हैं , यदि हां तो उसका विवरण एवं परिणाम। 
     •   (ज) क्या इस मामले में किसी फौजदारी/दीवानी/राजस्व अदालत में या विभागीय कोर्इ कार्यवाही हुर्इ या लंबितहै , हां तो उसका विवरण।
नोट :-
     •   कृपया परिवाद/शिकायत पर हस्ताक्षर/अँगूठा चिन्ह्र नहीं भूलें।
     •   परिवाद/शिकायत सचिव, राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग, जयपुर के पते पर भिजवावें।
आयोग का प्रमुख कार्यकारी अधिकारी आयोग का सचिव हैं। आयोग के अन्वेषण कार्य के लिए महानिरीक्षक स्तर का एक पुलिस अधिकारी नियुक्त है:।