आयोग की गतिविधियां

 आयोग के कार्य क्षेत्र में सभी प्रकार के वे मानव अधिकार आते हैं जिनमें नागरिक, राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकार शामिल हैं। आयोग हिरासत में हुर्इ मौतों, बलात्कार, उत्पीड़न, पुलिस और जेलों में ढांचागत सुधार, सुधार गृहों, मानसिक अस्पतालों की हालत सुधारने के मामलों पर विशेष ध्यान दे रहा है। समाज के सबसे अधिक कमजोर वर्ग के लोगों के अधिकारों का संरक्षण करने की दृष्टि से, 14 वर्ष की आयु तक के बच्चों को आवश्यक तथा निशुल्क शिक्षा प्रदान करने, गरिमा के साथ जीवन व्यतीत करने, माताओं और बच्चों के कल्याण हेतु प्राथमिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की, आयोग ने सिफारिशें की हैं। समानता और न्याय का हनन कर, नागरिकों के खिलाफ किए जा रहे अत्याचारों, विस्थापित हुए लोगों की समस्याएं, और भूख के कारण लोगों की मौंतें, बाल श्रमिकों का शोषण, बाल वेश्यावृत्ति, महिलाओं के अधिकारों आदि पर आयोग ने अपना ध्यान केन्द्रित किया है।
अपनी व्यापक रूप से बढ़ती हुर्इ जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए आयोग ने शिकायतों की जॉंच के अलावा निम्नलिखित कार्यों को भी अपने हाथ में लिया है:
     •   पुलिस द्वारा गिरफ्तार करने के अधिकार के दुरूपयोग को रोकने के लिए दिशा-निर्देश।
     •   जिला मुख्यालय में‘ ‘मानव अधिकार प्रकोष्ठक’’ की स्थापना।
     •   हिरासत में हुर्इ मौतों, बलात्कार और मानवीय उत्पीड़न को रोकने के उपाय।
     •   व्यवस्थागत सुधार (1)पुलिस (2)जेल (3)नजर बन्दी केन्द्र।
     •   माताओं में अल्प रक्तता और बच्चों में जन्मजात मानसिक अपंगता की रोकथाम।
     •   एचआर्इवी/एड्स से पीड़ित लोगों के मानव अधिकार।
     •   मानसिक अस्पतालों की गुणवत्ता में सुधार।
     •   हाथ से मैल ढोने की प्रथा समाप्त करने के लिए प्रयास।
     •   गैर-अधिसूचित और खानाबदोश जनजातियों के अधिकारों का संरक्षण करने के लिए सिफारिशें करना।
     •   जनस्वास्थ्य प्रदूषण नियंत्रण, खाद्य पदार्थो में मिलावट की रोकथाम, औषधियों में मिलावट व अवधि पार औषधियों पर रोक।
     •   धर्म, जाति, उपजाति आदि के बहिष्कार के मामलात।
     •   मानव अधिकारों की शिक्षा का प्रसार और अधिकारों के प्रति जागरूकता में वृद्धि।
 'मानवाधिकार' शब्द मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम की धारा 2 (घ) में परिभाषित है, जिसके अन्तर्गत मानवाधिकार से अभिप्राय है संविधान में उल्लिखित अथवा अन्तर्राष्ट्रीय प्रसंविदा में अंगीभूत व्यक्ति की जीवन, स्वतंत्रता, समानता और प्रतिष्ठा से संबंधित अधिकार जो न्यायालय द्वारा लागू योग्य हो ।
 'मानवाधिकार' की परिभाषा इस प्रकार काफी व्यापक है, जिसके अन्तर्गत वे सब मुद्दे आते हैं जो जीवन, स्वतंत्रता, समानता और गरिमा के परिधि के भीतर हैं ।
 इस प्रकार मानवाधिकार का उल्लंघन पुलिस ज्यादती, अभिरक्षा मृत्यु, मुठभेड़ में मृत्यु, पुलिस या अन्य पदाधिकारी/लोक सेवक द्वारा व्यक्तियों को परेशान करना तक ही सीमित नहीं है । इसके अन्तर्गत अन्य सिविल, राजनीतिक, शैक्षणिक तथा सांस्कृतिक अधिकारों, जिससे रिमांड होम या कारागारों की दशा, मजदूर वर्ग की दशा, दहेज मृत्यु या दहेज की मांग, बलात्कार और हत्या, लैंगिक प्रताड़ना, महिलाओं पर अत्याचार एवं अप्रतिष्ठा, बाल मजदूर और बंधुआ मजदूर, बाल-विवाह, समुचित शैक्षणिक सुविधाओं से वंचित करना, गरीबी उन्मूलन तथा सामाजिक सुरक्षा संबंधित कार्यक्रम, समुचित स्वच्छता की दशाएँ, स्वस्थ वातावरण आदि से संबंधित अधिकार भी प्राप्त हैं, यदि वे अधिकार न्यायालयों द्वारा बाध्य किये जाने योग्य हों ।